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Artist in Confusion

Ashwini Ahuja’selegant stories tell the accounts of love, hate; passion and disappointment altogether. All the stories in”Artist in Confusion” have been written with absorbing intelligence, sympathy, passion and enthusiasm.  In this book of love & relationships, you will see different shades of life.

In Nightmarish Note, protagonist Sushma’s obsession in making relationships with an Australian guy and her obsession for “the well utilization of prize money” finally gives her frustration and disillusionment. 

Mystery of a Girl is a love story of teenage lovers which finally end up in fiasco due to the whims of mystery girl. The egocentricity and bargaining in love highly prevails in the story. The story give a candid message if you are dishonest in relationship, you will gain nothing but for disillusionment, distress and disappointment.More.........

Artist in Confusion
bok1

टेरेरिस्ट...


रामदास औंधे मुंह चारपाई पर पड़ा था. पड़ा तो वह रोज ही रहता था लेकिन आज वह औधें मुंह लेटा पड़ा था. उसके चेहरे पर निश्चिंतता और संतोष का उजाला नहीं था बल्कि रेंग रहा था घुटा घुटा सा तनाव, आतंक की अजब सी चाय, दुष्ट मुस्कराहट और मरा हुआ सा आग्रह.  मरा हुआ सा आग्रह उनके प्रति जो उसकी बेटी को अपहृत कर ले गए थे. हुह! भडवे कहते हैं- हम मिलिटेंट. अरे सालों! तुम जैसे होते है मिलिटेंट, जो दूसरों की बहू बेटियों को उठाकर ले जाते हैं. फिरौती वसूलते हैं. कुत्तों, तुम तो उग्रवादी हो...बदमाश..मर्सनरीज, टेरेरिस्ट! पिछले एक साल से उसने अंग्रेजी ज्ञान का चाहे और कुछ सीखा हो या नहीं लेकिन दिल दहलाने वाले दो लफ्ज जरूर सीख लिए थे.More.........

टेरेरिस्ट...

कलम की तलाश में

कवि और यह दुनिया
कवि, तुम कहाँ भटके हुए हो?
कहाँ अटके हुए हो?
सौन्दर्य तुम्हारा जीवन नहीं है.
अस्तित्व भी नहीं है.
हँसना तुम्हारे लिए निषेध है. रोना सीखो! रोना!!
शायद दो चार कविताएँ बिक जाएँ.
क्योंकि दुनिया संवेदनाएं उडेलने में महारत हासिल किये हुए होती है.
अपनी सुन्दर प्रेरणा को रंडिया बबुआएन की तरह घुंघरू बंधवा कर बाज़ार ले जाओ
और कोठे पर बिठा दो
क्योंकि More.....

कलम की तलाश में

एक चूहा मरा हुआ

चेयरमैन की कुर्सी हिल रही थी.
हिल नहीं रही थी बल्कि वे उसे हिला रहे थे, कुर्सी पर बैठे हुए, स्वयं हिलते हुए. कुर्सी के नितांत सामने एक मेज पड़ा था जिस पर सुंदर, कढा हुआ मेजपोश बिछा हुआ था. मेज के दायीं और नीचे जमीन पर अंग्रेजी-हिंदी अखबारों का मिला जुला पुलिंदा रखा था. मेज के ऊपर बाएं कोने में पड़े राखदान  में धुआं निकलता हुआ; चेयरमैन  की बड़ी-बड़ी परन्तु धंसी हुयी आँखों के आगे लेते हुए दी हिंदुस्तान के पन्नों को चीरता हुआ; छत को फाड़ने की कोशिश करता हुआ, कमरे के दायीं और वाली खिड़की के रास्ते से बाहर निकल रहा था जिसे कि चपरासी थोडी देर पहले किताबों वाली शेल्फ को वस्त्र से पोंछते हुए खोल गया था. कमरे के बाहर का कोलाहल चेयरमैन को बेहद कष्ट पहुंचा रहा था. लेकिन वे फिर भी अखबार पड़ने में तल्लीन थे. सामने का दरवाज़ा तो खुला था लेकिन अन्दर बैठे चेयरमैन को पास से गुजरता कोई भी व्यक्ति कोशिश करने पर भी नहीं देखा पाता था. कमरे दे दायीं ओर खिड़की के रास्ते से जब कभी समीर का झोंका कमरे की नीरवता को भंग करके किवाडों की बगल में लटकी चिलमन से अठखेलियाँ करता तब कही जाकर बाहर खड़ा कोई व्यक्ति अन्दर अखबार पढ़ रहे चेयरमैन को देख पाता. दरवाजे पर किसी के आने की आहट हुई चेयरमैन ने अपनी आदत के अनुसार नज़र अखबार पर ही टिकाए आगंतुक को परवेश की अनुमति प्रदान कर दी. थोड़ी देर बाद जब उनके पास कोई न आया तो उन्होंने दरवाजे की ओर देखा. दरवाजे की चौखट पर एक बिल्ली बैठी थी. More....

एक चूहा मरा हुआ